स्थाई खेल अधिकारी की कमी से खिलाड़ियों का भविष्य अधर में, उमा पटेल के पास तीन जिलों का प्रभार

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर स्वतंत्र हरदा
हरदा। खेलों में प्रदेश में अग्रणी हरदा जिले में स्थाई खेल अधिकारी की नियुक्ति न होने के कारण खिलाड़ियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में हरदा का प्रभार नर्मदापुरम और खंडवा के साथ नर्मदापुरम की खेल अधिकारी उमा पटेल के पास है। उनके पास 3 साल से हरदा का प्रभाव है, तीन जिलों का कार्यभार होने से न तो अधिकारी हरदा में नियमित रूप से उपस्थित रहती हैं और न ही खिलाड़ियों की समस्याओं का समाधान हो पाता है। हरदा जैसे खेल प्रधान जिले में स्थाई खेल अधिकारी की अनुपस्थिति न केवल खिलाड़ियों के भविष्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह प्रशासन की उदासीनता को भी उजागर करता है।
खेल अधिकारी की गैरमौजूदगी से खिलाड़ियों की परेशानियां
स्वतंत्र समय के संवाददाता ने नेहरू स्टेडियम में खिलाड़ियों से चर्चा की और पूछा कि क्या खेल अधिकारी उनसे मिलने आती हैं या उनकी समस्याओं पर ध्यान देती हैं। इस पर खिलाड़ियों ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि खेल अधिकारी कब हरदा आती हैं और कब चली जाती हैं। मंगलवार को कमल खेल उत्सव के कारण उमा पटेल हरदा में दिखाई दी थीं, लेकिन सामान्य दिनों में उनकी अनुपस्थिति से खेल विभाग ठप सा हो गया है।हरदा का खेल विभाग खिलाड़ियों की समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। अधिकतर समय खेल विभाग का कार्यालय बंद रहता है, और वहां केवल चपरासी मौजूद रहते हैं। स्थाई खेल अधिकारी की कमी के कारण खिलाड़ियों की समस्याओं का समाधान करने वाला कोई नहीं है।
हरदा जिले में स्थाई खेल अधिकारी की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है, ताकि:
1. खिलाड़ियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सही मार्गदर्शन मिल सके। 2. खेल आयोजनों की योजना और क्रियान्वयन बेहतर हो सके। 3. खेल विभाग का कामकाज सुचारू रूप से चल सके। हरदा जिले में स्थाई खेल अधिकारी की नियुक्ति के लिए कलेक्टर आदित्य सिंह को तुरंत कदम उठाने चाहिए। इससे न केवल खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि उन्हें अपनी समस्याओं को साझा करने और उनके समाधान का अवसर भी मिलेगा।



