
शाहरुख बाबा चीफ़ एडिटर स्वतंत्र हरदा
हरदा। रविवार को शहर के एक निजी होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वन अधिकार अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेमंत टाले ने आरोप लगाया कि वन अधिकार अधिनियम से संबंधित जानकारी मांगने के बावजूद पांच महीने बीत जाने पर भी प्रशासन ने कोई जवाब उपलब्ध नहीं कराया।
हेमंत टाले ने बताया कि उन्होंने लगभग पांच माह पूर्व संबंधित एसडीएम एवं उपविभागीय वन अधिकार समिति को लिखित आवेदन देकर हरदा जिले के तीनों विकासखंडों में गठित वन अधिकार समितियों की संख्या, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकारों के लाभार्थियों की ग्रामवार सूची तथा लंबित दावों की स्थिति की जानकारी मांगी थी। उनका दावा है कि आज तक यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम वर्ष 2006 में बना और 2008 से लागू हुआ, लेकिन आज भी वन क्षेत्रों में रहने वाले अनेक पात्र आदिवासी एवं अन्य परंपरागत वनवासी अपने अधिकारों से वंचित हैं। उनका आरोप था कि वन विभाग द्वारा कई स्थानों पर तारबंदी किए जाने से ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकार प्रभावित हुए हैं तथा जंगल से मिलने वाले संसाधनों तक उनकी पहुंच सीमित हो गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में धनसिंह भल्लवी ने भी कहा कि वन क्षेत्रों में निवास करने वाले पात्र लोगों को वन अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाले अधिकार शीघ्र प्रदान किए जाने चाहिए और लंबित दावों का निष्पक्ष निराकरण होना चाहिए। प्रशासन से वन अधिकार अधिनियम से संबंधित सभी जानकारियां सार्वजनिक करने, लंबित दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा पात्र हितग्राहियों को कानून के अनुसार उनके अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। इसमें धनसिंह भल्लवी, पुरुषोत्तम कलाम एवं हार्दिक जायसवाल भी मौजूद रहे।



