हरदा में सुअर पकड़ने गई नपा और इंदौर की टीम पर हमला…. कोतवाली पुलिस देखते रही तमाशा
पुलिस की मौजूदगी में महिलाओं ने चलाए डंडे, पिकअप के कांच तोड़कर सुअर छुड़ाए; 4 घंटे थाने में बैठी रही इंदौर की टीम, FIR को लेकर उठे सवाल

शाहरुख बाबा चीफ़ एडिटर स्वतंत्र हरदा
हरदा। शहर की श्रीधाम कॉलोनी में बुधवार को नगर पालिका द्वारा सुअर पकड़ने की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हो गया। नगर पालिका परिषद हरदा द्वारा इंदौर से बुलाई गई सुअर पकड़ने वाली टीम पर महिलाओं और पुरुषों ने कथित तौर पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। आरोप है कि हमले के दौरान पिकअप वाहन में तोड़फोड़ की गई, वाहन के कांच तोड़े गए और ताला तोड़कर पकड़े गए सुअरों को बाहर निकाल दिया गया। घटना के समय मौके पर पुलिस, नगर पालिका और वन विभाग का अमला मौजूद था। इसके बावजूद नगर पालिका कर्मचारियों और इंदौर से आई टीम के साथ मारपीट होती रही। घटना ने पुलिस की कार्रवाई और मौके पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के सामने होती रही मारपीट, कार्रवाई पर सवाल
नगर पालिका की टीम शहर में बढ़ती सुअरों की संख्या को देखते हुए कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान श्रीधाम कॉलोनी में कुछ महिलाओं और पुरुषों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर लाठी-डंडों से टीम के सदस्यों के साथ मारपीट शुरू कर दी गई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में भी महिलाएं और अन्य लोग नगर पालिका तथा इंदौर की टीम के सदस्यों के साथ मारपीट करते रहे। इस दौरान पिकअप वाहन को भी निशाना बनाया गया और उसमें रखे सुअरों को छुड़ाकर भगा दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस बल मौके पर मौजूद था, तो शासकीय कार्रवाई में बाधा डालने और कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट को तत्काल क्यों नहीं रोका गया?

4 घंटे थाने में बैठी रही टीम, FIR को लेकर असमंजस
घटना के बाद इंदौर से आई टीम कोतवाली थाने पहुंची। बताया जा रहा है कि टीम करीब चार घंटे तक थाने में बैठी रही, लेकिन तत्काल FIR दर्ज नहीं हो सकी। बताया गया कि पुलिस की ओर से शिकायत देने की बात कही गई। इसके बाद नगर पालिका सीएमओ ने मामले को लेकर एसपी और कलेक्टर से चर्चा करने की बात कही और उसके बाद FIR दर्ज कराने की बात सामने आई।
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहर में सुअरों की समस्या, कार्रवाई करने वाली टीम पर ही हमला हरदा शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में सुअर खुले में घूमते दिखाई देते हैं। गली-मोहल्लों में इनके कारण गंदगी फैलने और संक्रमण का खतरा बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इसी समस्या को देखते हुए नगर पालिका ने शहर में सुअरों को पकड़ने के लिए इंदौर से टीम बुलाकर कार्रवाई शुरू की थी। लेकिन कार्रवाई के दौरान टीम पर ही हमला होने से अब सवाल यह है कि क्या शहर में शासकीय अमला पुलिस सुरक्षा में भी अपनी कार्रवाई नहीं कर सकता? अगर नगर पालिका की कार्रवाई से किसी व्यक्ति को आपत्ति थी तो उसका विरोध कानूनी तरीके से किया जा सकता था। लेकिन कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट, वाहन में तोड़फोड़ और पकड़े गए जानवरों को छुड़ाने की घटना को लेकर अब पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल….
घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद स्थिति इतनी बिगड़ने क्यों दी गई। क्या पुलिस के पास महिला पुलिस बल उपलब्ध नहीं था? यदि महिला प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने में परेशानी थी तो अतिरिक्त बल को तत्काल मौके पर क्यों नहीं बुलाया गया। नगर पालिका कर्मचारियों और बाहर से आई टीम की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट और वाहन में तोड़फोड़ के आरोपों पर क्या कार्रवाई करती है।
अब सवाल…. हैं
जब पुलिस की आखों के सामने शासकीय टीम पर हमला होने का आरोप है, तो कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार क्यों? क्या ऐसे मामलों में मौके पर ही कानून का प्रभावी पालन नहीं कराया जाना चाहिए?



