हरदा मंडी सचिव श्रीवास्तव हुए निलंबित। क्या है पूरा मामला देखिए
हरदा मंडी सचिव ने खरगोन में 1 करोड़ 89 लाख का अनादिकृत रूप से किया था भुगतान जांच टीम की रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर मंडी सचिव को किया निलंबित

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर
स्वतंत्र हरदा: स्थानिक कृषि उपज मंडी में पदस्थ मंडी सचिव संजीव श्रीवास्तव को मंडी बोर्ड द्वारा खरगोन में अनादिकृत रूप से खाते में विक्रेताओं के खाते में एक करोड़ 89 लाख की राशि डाली जाने और इस बात की सूचना मंडी बोर्ड या उच्च अधिकारियों को नहीं दिए जाने तथा मनमर्जी से कार्य करने तथा कूट रचित दस्तावेज तैयार कर व्यक्तिगत रूप से किसी फॉर्म को लाभ पहुंचाने के आरोप में दोषी पाते हुए मंडी बोर्ड द्वारा 29 जनवरी को आदेश पारित करते हुए वर्तमान पदस्थापना हरदा मंडी सचिव संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया है।
यह है सारा मामला
खरगोन जिले की कृषि उपज मंडी में तत्कालीन पदस्थ रहे संजीव श्रीवास्तव द्वारा फर्म रवि जिनिंग उद्योग की अनुज्ञप्ति दिनांक 313 2017 को समाप्त हो गई थी यह तत्व भी विवादित रूप से प्रमाणित है कि रवि जिनिंग उद्योग के द्वारा इसके अपराध भी अनार अधिकृत रूप से मंडी प्रांगण में व्यापार जारी रखा गया तथा 1 महीने तक लगातार कृषकों से क्रय की गई कृषि उपज का भुगतान संबंधित कृषिकों को नहीं किया गया जबकि रवि जिनिंग फॉर्म की अनुज्ञप्ति मार्च 2017 में ही समाप्त हो चुकी थी किंतु मंडी सचिव के साथ मिलकर कूट रचित दस्तावेज तैयार कर रवि जिनिग फार्म का नवीनीकरण किए जाने का प्रयास किया गया और कृषकों से अनुज्ञप्ति समाप्त होने के बाद भी खरीदी की गई जो की नियम विरोध है तत्कालीन मंडी सचिव रहे संजीव श्रीवास्तव द्वारा अपने डिवाइस और पद का दुरुपयोग करते हुए अनधिकृत रूप से कार्य किया गया है तथा मंडी प्रांगण में हो रहे अनैतिक कार्य को रोकने में भी नाकाम रहे और मंडी नियमों का पालन न करते हुए मंडी निधि का दुरुपयोग करते हुए 1 करोड़ 89 लाख 98 हजार 467 रुपए की राशि का दुरुपयोग करते हुए अपने स्तर पर खर्च किया गया है जिससे वह पूर्ण रूप से दोषी साबित होते हुए जांच टीम द्वारा मंडी बोर्ड को रिपोर्ट सौपी जाने के बाद तत्कालीन समय में खरगोन जिले की मंडी में मंडी सचिव के पद पर पदस्थ रहे और वर्तमान में हरदा में पदस्थ मंडी सचिव संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
और भी हो सकते हैं मामले में दोषी
खरगोन में तत्कालीन समय में पदस्थ रहे मंडी सचिव रहे संजीव श्रीवास्तव द्वारा लगातार अपनी नाकामियां साबित करने और नियम विरुद्ध तरीके से कार्य करने तथा करोडो की राशि का अपने स्तर पर हेर फेर करने में अन्य बाबू तथा कर्मचारियों का भी हाथ है जिनकी भी जांच होनी चाहिए तथा इतने बड़े स्तर पर मंडी सचिव द्वारा धांधली किए जाने पर उच्च अभी तक ध्यान क्यों नहीं दिया गया था क्या मंडी सचिव को निलंबित करते हुए ही मामले को समाप्त कर दिया जाएगा या मंडी सचिव की एफआईआर भी दर्ज की जाएगी यह तो विभाग के ऊपर है किंतु ऐसे कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाना चाहिए जिससे ऐसे कार्य करने वाले अधिकारियों पर लगाम लगाया जा सके।



