79वें स्वाधीनता दिवस समारोह में भी हुई गलती, ध्वजारोहण के स्थान पर किया ध्वज फहराना

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर स्वतंत्र हरदा
हरदा। आज़ादी के 79वें वर्ष में भी हरदा जिला मुख्यालय पर स्वाधीनता दिवस का ध्वजारोहण, परंपरा के अनुरूप नहीं हो सका। मुख्य अतिथि कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने ध्वज का धीरे-धीरे आरोहण करने के बजाय उसे पहले से ऊपर बंधा हुआ रखते हुए फहराया, जो कि गणतंत्र दिवस की पद्धति है। इस दौरान एसपी अभिनव चौकसे भी मंच पर उपस्थित रहे।गौरतलब है कि स्वाधीनता दिवस पर ध्वज नीचे से ऊपर धीरे-धीरे खींचकर आरोहित किया जाता है और ऊपर पहुँचने के बाद उसे फहराया जाता है। वहीं गणतंत्र दिवस पर ध्वज पहले से पोल के शीर्ष पर बंधा होता है और मुख्य अतिथि रस्सी खींचकर उसे खोलते हैं, जिससे वह फहरने लगता है। इस बार 15 अगस्त के अवसर पर भी गणतंत्र दिवस वाली पद्धति अपनाई गई।
जानकारों का कहना है कि यह महज़ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्व की परंपरा और गरिमा से जुड़ा मुद्दा है। आज़ादी के करीब 8 दशक बाद भी यदि जिला प्रशासन और जनसंपर्क विभाग को इस महत्वपूर्ण अंतर की जानकारी नहीं है, तो यह स्थिति खेदजनक है।
ध्वजारोहण और ध्वज फहराने में अंतर
स्वाधीनता दिवस (15 अगस्त): ध्वज नीचे से ऊपर आरोहित (खड़ा किया) जाता है, जिससे यह प्रतीक होता है कि 1947 में देश ने कठिन संघर्ष के बाद स्वतंत्रता पाई और पहली बार तिरंगा ऊपर चढ़ाया गया।
गणतंत्र दिवस (26 जनवरी): ध्वज पहले से ऊपर बंधा होता है, जिसे खींचकर खोला जाता है। यह दर्शाता है कि देश पहले से स्वतंत्र है और संविधान लागू हो चुका है।




