डोलार उत्सव: हरदा के वन गाँव में आदिवासी संस्कृति की अद्भुत झलक

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर
हरदा। जिले के वन ऊंचा बरारी, बोथी में इन दिनों आदिवासी समुदाय का प्रमुख त्यौहार डोलार उत्सव बड़ी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस उत्सव का आयोजन विशेष रूप से आदिवासी समाज की महिलाएं कर रही हैं, जिसमें सर्व आदिवासी महिला संगठन की जिला अध्यक्ष राखीकरोची ने जानकारी देतेहुए बताया। पोला अमावस्या से पंचमी तक चलता है उत्सव डोलार उत्सव की शुरुआत पोला अमावस्या के दिन होती है, जब गाँव में विशेष झूला सजाया जाता है। यह झूला विभिन्न रंग-बिरंगे गुब्बारों और सजावटी सामग्रियों से सजाया जाता है। इस उत्सव की खास बात यह है कि पंचमी के दिन इसे पूरे गाँव में घुमाया जाता है और नदियों में जाकर इसे ठंडा किया जाता है।
महिलाओं और लड़कियों की विशेष भागीदारी
डोलार उत्सव में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी प्रमुख रहती है। सजाए गए झूले पर लड़कियां झूलती हैं, और गाँव की गलियों में गदली, ढोल, ढकार और ढोलक की धुनों पर पारंपरिक आदिवासी नृत्य किया जाता है। इस उत्सव के दौरान पूरा गाँव एकजुट होकर आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का उत्सव मनाता है।
आदिवासी सभ्यता की अद्भुत झलक
डोलार उत्सव न केवल आदिवासी समुदाय की गहरी सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है, बल्कि यह त्यौहार उनके सामाजिक और धार्मिक जीवन का भी अभिन्न हिस्सा है। इस उत्सव के माध्यम से वनांचल के गाँवों में आदिवासी सभ्यता की अनूठी और अद्भुत झलक देखने को मिलती है।



