राजनीतिक यू-टर्न पर सवाल: राजपूत समाज के आक्रोश के बाद सक्रिय हुई बीजेपी, पहले क्यों रही खामोश?

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर स्वतंत्र हरदा
हरदा। 13 जुलाई को हरदा में राजपूत छात्रावास में हुई पुलिस लाठीचार्ज की घटना के बाद जहां जिले भर में आक्रोश की लहर फैल गई, अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार प्रशासन किसके दबाव में निर्णय ले रहा है, और क्या वाकई वह पीड़ित समाज के साथ है या केवल राजनीतिक संतुलन साधने में जुटा हुआ है? घटना के बाद शुरू हुई तीखी प्रतिक्रिया और विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस नेताओं और सर्व समाज के पदाधिकारियों ने खुलकर राजपूत समाज के समर्थन में खड़े होकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधायक जयवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री पीपी शर्मा विधायक आर.के दोगने और अन्य नेताओं ने न केवल पीड़ितों से मुलाकात की, बल्कि लाठीचार्ज की निंदा करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। जब पूरे शहर में आक्रोश था, सैकड़ों लोग सड़कों पर थे, तब भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं की चुप्पी ने आम जन और समाज को निराश किया। चाहे वह पूर्व मंत्री हों या नगर पालिका अध्यक्ष 13 जुलाई की रात को राजपूत समाज के समर्थन में कोई भी सामने नहीं आया। न कोई बयान, न कोई सांत्वना।
फिर प्रशासन ने खोजा सहारा
जैसे-जैसे विरोध तेज हुआ और मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने के बाद प्रशासनिक रुख में बदलाव आया, उसी के साथ कुछ ऐसे चेहरे कलेक्टर-एसपी से मिलने पहुंचे जो न तो घटना के प्रत्यक्षदर्शी थे, न ही शुरू से किसी आंदोलन में शामिल थे। स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे स्क्रिप्टेड ड्रामा बताया। 14 जुलाई को जिन प्रतिनिधियों से प्रशासन ने आवेदन लिया, उनमें से अधिकांश लोग घटना के समय बिल्कुल निष्क्रिय थे। इसके बावजूद प्रशासन ने उनके माध्यम से धारा 144 हटाने और करणी सेना जिलाध्यक्ष सुनील सिंह राजपूत व अन्य की रिहाई का दिखावटी आधार बनाया। फिर हरदा जनसंपर्क के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि “सर्व समाज” के प्रतिनिधियों ने आवेदन देकर रिहाई और प्रतिबंध हटाने का निवेदन किया। लेकिन इस “सर्व समाज” में वे असली लोग कहां हैं, जिन्होंने घटना की रात बायपास चौराहे पर धरना दिया था? वे नेता कहां हैं जो प्रशासन से ज्ञापन देने पहुंचे थे। ब्राह्मण समाज, धर्म रक्षा समिति, और राजपूत समाज के सैकड़ों कार्यकर्ता तीन दिनों तक धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से आवाज़ उठा रहे थे, उन्हें दरकिनार कर कुछ राजनीतिक चेहरों को बुलाकर प्रशासन ने सिर्फ “फोटो सेशन” और “बयानबाजी” की।
कांग्रेस नेताओ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा तब सक्रिय हुई जब राजपूत समाज का आक्रोश पार्टी के खिलाफ स्पष्ट रूप से दिखने लगा। उसी समय जिला भाजपा अध्यक्ष और उनके साथियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और प्रशासन के फैसलों का श्रेय लेने का प्रयास किया।
सोशल मीडिया पर भी उठा सवाल
हरदा के युवा आनंद जाट सहित कई लोगों ने फेसबुक पर लिखा कि जो नेता आज फोटो खिंचवा रहे हैं, वे घटना के दिन कहां थे? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई भाजपा नेता पहले से जानते थे कि 13 तारीख को क्या होने वाला है, फिर भी समाज को आगाह नहीं किया और चुप्पी साधे रहे।



