हरदा

आम तोड़ने पर छात्र की पिटाई का वीडियो वायरल छात्र ने बोला प्रबंधक ने डंडों से पीटा, दीवार के पार फेंका; पिता ने एसपी से मिलकर कहा कोई शिकायत नहीं है

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर स्वतंत्र हरदा

हरदा | वैदिक विद्यापीठ में पढ़ने वाले सातवीं कक्षा के छात्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में छात्र हाथ-पैर में पट्टियाँ बांधे बिस्तर पर लेटा दिख रहा है और कह रहा है मैंने आम तोड़ा था, तब स्कूल के प्रबंधक व्यास ने डंडों से पीटा और दीवार के उस पार फेंक दिया। जिससे मेरे हाथ और पांव में फ्रैक्चर आ गया। यह वीडियो सामने आने के बाद हरदा में शिक्षा संस्थानों की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

पिता बोले कोई शिकायत नहीं दी

इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित छात्र अपने पिता के साथ शनिवार को पुलिस अधीक्षक अभिनव चौकसे से मिलने पहुंचा। दोनों ने करीब 30 मिनट तक चर्चा की, लेकिन बाहर आकर पिता ने मीडिया से कहा हमने किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी है। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि यदि छात्र के साथ वाकई ऐसा बर्ताव हुआ था तो शिकायत क्यों नहीं की गई?

स्कूल प्रबंधन  ने कहा नीचे कूदने से लगी चोट

विद्यालय प्रबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि छात्र पेड़ पर कैरी तोड़ने चढ़ा था। शिक्षक को देखकर घबराकर नीचे कूद गया जिससे उसे चोट आई। पिटाई या दीवार से फेंकने की बात पूरी तरह गलत है।वीडियो में छात्र स्पष्ट और सधे हुए शब्दों में बोलता है। यह भी कहा जा रहा है कि वीडियो शूट करने वाले व्यक्ति के सवाल सुनियोजित हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह वीडियो एकतरफा हो सकता है और सच्चाई कुछ और हो।

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने फेसबुक पर ट्वीट कर कहा कि किसान नेता समाज सेवी केदार सिरोही जी ने मुझे उनके द्वारा इस गंभीर घटना की सूचना दी है। एसपी व कलेक्टर महोदय द्वारा इसको संज्ञान में ले कर शीघ्र कार्यवाही करना चाहिए। नर्मदा यात्रा के समय मैं यहां रात रुका था और मैंने सांसद निधि से योगदान भी दिया था। मैं प्रबंधक गणों से अनुरोध करूँगा इस कृत्य करने वाले शिक्षक पर शीघ्र कार्यवाही करें।

दिग्विजय सिंह राजसभा  सांसद

कांग्रेस नेता केदार सिरोही ने कहा की वैदिक विद्या पीठ, चिचोट कुटी, जिला हरदा में अध्ययनरत छात्र सामर्थ पालीवाल को मात्र आम के पेड़ से कैरी तोड़ने के अपराध में विद्यालय के प्रबंधक रामबीर व्यास द्वारा इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उसके हाथ-पैर तोड़ दिए गए। यह कृत्य न केवल क्रूरता की चरम सीमा है, बल्कि राइट टू एजुकेशन एक्ट, जेजे एक्ट, और मानवाधिकार कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

 

इस मामले में और भी चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल प्रबंधन ने न तो छात्र के अभिभावकों को सूचित किया, न ही पुलिस, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) या किसी भी वैधानिक संस्था को। बच्चे को किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सहायता भी विद्यालय द्वारा नहीं दी गई, ऐसा छात्र के पिता द्वारा बताया गया है।जब छात्र के पिता छत्तीसगढ़ से हरदा पहुँच कर माननीय एस.पी. साहब से मिले, तो उन्हें न्याय दिलाने के बजाय दो दिन का समय मांगा गया। क्या विद्यालय संघ से जुड़ा हुआ है इसलिए पुलिस, विभाग और शिक्षा विभाग कार्यवाही करने से डरेंगे? यह सवाल उठता है कि क्या हमारे प्रदेश में दो तरह के कानून लागू हैं एक आम नागरिक के लिए और दूसरा संगठनों से जुड़े प्रभावशाली लोगों के लिए? इस प्रकरण में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर दोषी विद्यालय प्रबंधक को गिरफ्तार किया जाए। छात्र को उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधा और मानसिक सहयोग दिया जाए। CWC और शिक्षा विभाग की लापरवाही की जांच की जाए। इस विद्यालय की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित की जाए। आरटीई एक्ट के अंतर्गत बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना स्पष्ट रूप से अपराध है। यदि इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो इससे प्रदेशभर में गलत संदेश जाएगा कि संस्थागत हिंसा को संरक्षण प्राप्त है।

Swatantra Harda

Related Articles

Back to top button