जनसुनवाई में अतुल शुक्ला के व्यवहार पर उठे सवाल: कलेक्टर से कार्रवाई की मांग, जनसुनवाई के दौरान आवेदनकर्ताओं को उचित सुनवाई न मिलने के आरोप

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर
स्वतंत्र हरदा। जिला पंचायत में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन हाल ही में इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। विकास नगर निवासी गीता विश्वकर्मा ने आरोप लगाया है कि पर्ची मार्गदर्शक बाबू अतुल शुक्ला ने आवेदकों को उचित अधिकारियों से मिलने नहीं दिया और उनसे अभद्र व्यवहार किया।

गीता विश्वकर्मा ने लगाए गंभीर आरोप
गीता विश्वकर्मा के अनुसार, जब वह अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में आईं, तो अतुल शुक्ला ने उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि वह पिछली जनसुनवाई में भी आ चुकी हैं। इस दौरान शुक्ला ने आवेदकों को सही अधिकारी से मिलने का अवसर न देते हुए उन्हें अपने हिसाब से निपटा दिया। गीता का कहना है कि शुक्ला ने आवेदकों के साथ बदतमीजी की और उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर किया।
आवेदकों की मांग है कि कलेक्टर सिंह इस मामले को गंभीरता से और अतुल शुक्ला पर कार्रवाई करें। इसके अलावा, उन्हें शुक्ला को यह नसीहत भी देनी चाहिए कि भविष्य में वह हितग्राहियों के साथ सम्मानजनक और शालीन व्यवहार करें। जनसुनवाई में एक अन्य मामला हंडिया तहसील के निवासी के नामांतरण से जुड़ा था। आवेदक ने बताया कि शुक्ला ने उन्हें तहसील कार्यालय में आवेदन देने की नसीहत दी, जबकि उनकी समस्या का समाधान जनसुनवाई में ही होना चाहिए था। इस पर भी आवेदक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब उनकी समस्या हंडिया से संबंधित है, तो उन्हें टिमरनी जाने की क्या जरूरत है?
गीता विश्वकर्मा और अन्य आवेदकों द्वारा लगाए गए आरोप जनसुनवाई की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। आवेदकों का कहना है कि जब वे अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं, तो उन्हें सही तरीके से सुनवाई और समाधान नहीं मिल रहा। प्रशासनिक अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और ऐसे कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करें, ताकि आवेदकों को सम्मानपूर्वक व्यवहार और उचित समाधान मिल सके। जनसुनवाई की प्रक्रिया को सुधारने के लिए कदम उठाए जाएं। इसके तहत, कर्मचारियों को जनता के साथ शालीनता से पेश आने की हिदायत दी जाए, ताकि जनता की समस्याओं का सही समाधान हो सके और उन्हें बार-बार चक्कर न काटने पड़ें।



