कार्यवाही

पुलिस की नज़रों के सामने रहने वाले जनपद उपाध्यक्ष पर सीधे ₹3000 का इनाम! 2019 के पुतला दहन मामले में 2026 में मिला पहला नोटिस, 7 साल बाद घोषित किया ‘फरार’—पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल

हरदा। 2019 में कलेक्टर चौराहा पर हुए पुतला दहन मामले में दर्ज धारा 188 भादंवि के प्रकरण पर सात साल बाद फिर हलचल तब मची जब पुलिस ने जनपद उपाध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा सहित 16 लोगों को ‘फरार आरोपी’ बताते हुए ₹3000 का इनाम घोषित कर दिया। घटना दिनांक से अब तक एक भी नोटिस नहीं मिलने और आरोपियों का लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने के बावजूद अचानक इनाम घोषित किए जाने पर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आयुष पाराशर, गोरीशंकर शर्मा, विरेन्द्र मालवीय, उमाशंकर विश्नोई, शिवनारायण बांके, अनोखीलाल गौर, रामराज राजपूत, लोकेश जानी विश्नोई, विपिन नामदेव, राजेन्द्र सोलंकी, सुहागमल पवार, राजकुमार झूरिया, जीसान खान, मनवीरसिंह रघुवंशी, अमित छलोत्रे और दिनेश मालवीय घटना से लेकर अब तक फरार बताए गए हैं। पुलिस अधीक्षक शशांक (भापुसे) ने पुलिस रेगुलेशन के पैरा 80-ए के तहत उनकी गिरफ्तारी पर ₹3000 का इनाम घोषित किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई लेकिन सफलता नहीं मिली।

जनपद उपाध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा की नाराज़गी पुलिस की नज़रों के सामने था, फिर भी फरार

इस कार्रवाई पर जनपद उपाध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा ने कहा कि वे नियमित रूप से पुलिस अधीक्षक कार्यालय, कोतवाली और अन्य विभागीय कार्यालयों में जनकार्य के लिए आते-जाते रहे हैं। इसके बावजूद आज तक उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मामला राजनीतिक दबाव में उठाया गया है और वर्तमान में जनपद उपाध्यक्ष होने के बावजूद उन्हें फरार दिखाकर सीधे इनाम घोषित करना उचित नहीं है। शर्मा ने बताया कि उन्होंने साथियों सहित गुरुवार को न्यायालय से जमानत प्राप्त कर ली है।

कांग्रेस का आरोप पुलिस विपक्ष को डराने की कोशिश में है

जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोहन बिश्नोई ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि धारा 188 का यह पुराना राजनीतिक मामला था जिसमें शामिल कई लोग वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं और कांग्रेस के हर कार्यक्रम में सक्रिय रूप से शामिल होते रहे हैं। बिश्नोई के अनुसार बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के चालान पेश करना और कार्यकर्ताओं को फरार घोषित कर इनाम तय करना विपक्ष को डराने की कोशिश प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि पुलिस कांग्रेस नेताओं को निशाना बना रही है जबकि मामले की प्रकृति ही राजनीतिक विरोध प्रदर्शन की थी।

कोर्ट से ज़मानत मिल चुकी अब प्रशासन पर और भारी पड़ेगा सवालों का बोझ

पूरा घटनाक्रम अब प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। जनपद उपाध्यक्ष के पुलिस की नज़रों के सामने लगातार सक्रिय रहने के बावजूद उन्हें फरार घोषित करना, सात वर्षों तक कोई नोटिस न देना और अचानक इनाम घोषित करना कई अहम सवाल पैदा करता है। न्यायालय से जमानत के बाद अब मामला और गंभीर हो गया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आखिर पुलिस किसके दबाव में काम कर रही है और इस कार्रवाई का उद्देश्य क्या था।

Swatantra Harda

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