अभियान

अधिकारियों के बदलते ही ठप पड़ जाती योजनाएं: हरदा में बाल भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान फिर कागज़ों में सिमटा, शहर में मासूम अब भी मांगने को मजबूर

तत्कालीन कलेक्टर आदित्य सिंह के कार्यकाल में चला था विशेष अभियान, नए प्रशासन में सुस्त पड़ा अमल; बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बाजारों में खुलेआम भिक्षा मांग रहे नाबालिग बच्चे।

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर स्वतंत्र हरदा

हरदा। जिले में अधिकारी बदलते ही योजनाओं का ठंडे बस्ते में चले जाना कोई नई बात नहीं है। ऐसे ही हालात अब बाल भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान के साथ भी देखने को मिल रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देशों और पूर्व कलेक्टर आदित्य सिंह के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस विशेष अभियान ने कभी शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की जो लहर पैदा की थी, वह अब लगभग समाप्त होती दिख रही है।

पूर्व में भी स्वतंत्र समय ने उठाया था भिक्षावृत्ति रोकथाम का मुद्दा

तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग संजय त्रिपाठी ने विकासखंड स्तर पर विशेष दलों का गठन कर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व ग्रामीण इलाकों में सर्वे, समझाइश और कानूनी जागरूकता की शुरुआत कराई थी। अभियान के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नागरिकों को यह बताया गया था कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 76 के अनुसार किसी भी बच्चे को भिक्षावृत्ति के लिए प्रयोग करने पर 5 वर्ष तक का कारावास और 1 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।

भिक्षावृत्ति रोकथाम, अभियान दिखावटी साबित हुआ था।

लेकिन आज, स्थिति इसके ठीक उलट दिखाई दे रही है। शहर में जगह-जगह बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, छिपानेर रोड, पुराना बाजार, मुख्य चौक-चौराहे—पर मासूम बच्चे अब भी खुलेआम भिक्षा मांगते देखे जा सकते हैं। प्रशासनिक अमल की कमी इतनी है कि कहीं भी निगरानी टीमों की उपस्थिति तो दूर, संबंधित विभाग इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई करता भी नहीं दिख रहा है।

Swatantra Harda

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