डॉक्टर एस.के. विश्वास का क्लीनिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए संचालित।
सोडलपुर में निजी मकान पर चल रहे क्लीनिक में अवैध एलोपैथिक उपचार और अनियमित इंजेक्शन प्रशासन की नजरों से बचते हुए जारी

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर
स्वतंत्र हरदा। सोडलपुर: डॉक्टर एस.के. विश्वास द्वारा एक निजी मकान पर चलाए जा रहे क्लीनिक में नियमों को ताक पर रखकर चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं। जांच में पाया गया है कि इस क्लीनिक में न तो कोई क्लीनिक का नाम बोर्ड पर लिखा हुआ है और न ही अन्य आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त हैं। यह भी सामने आया है कि डॉक्टर एस.के. विश्वास ने आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए पंजीकरण कराया हुआ है, लेकिन इसके बावजूद वह एलोपैथिक उपचार कर रहे हैं। उनके क्लीनिक में बिना किसी मान्यता के इंजेक्शन बोतल लगाए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस अवैध क्लीनिक में डॉक्टर का बेटा खुद मरीजों को इंजेक्शन और बोतल लगा रहा है, जो कि एक गैर-कानूनी और खतरनाक प्रक्रिया है। सोडलपुर में इस तरह के अवैध और गैर-व्यवसायिक चिकित्सा केंद्रों के संचालन पर प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए ताकि मरीजों की जान को बचाया जा सके।

भारत में चिकित्सा के तीन मुख्य पद्धतियों का अभ्यास किया जाता है: आयुर्वेदिक, एलोपैथिक, और होम्योपैथिक। प्रत्येक पद्धति के लिए अलग-अलग नियम और कानून निर्धारित किए गए हैं।
1. आयुर्वेदिक डॉक्टर:
यदि किसी डॉक्टर के पास आयुर्वेदिक चिकित्सा का रजिस्ट्रेशन है, तो वह केवल आयुर्वेदिक पद्धति के अनुसार ही इलाज कर सकता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर एलोपैथिक (ऑलोपैथी) पद्धति का इलाज नहीं कर सकते हैं।
2. होम्योपैथिक डॉक्टर:
होम्योपैथिक डॉक्टर केवल होम्योपैथिक पद्धति का उपयोग करके ही इलाज कर सकते हैं। उनके पास एलोपैथिक पद्धति का इलाज करने का अधिकार नहीं होता है।
नियमों का उल्लंघन:
यदि कोई डॉक्टर अपने पंजीकृत चिकित्सा पद्धति से भिन्न पद्धति का अभ्यास करता है, तो यह अवैध माना जाता है और इस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह चिकित्सा परिषद या स्वास्थ्य विभाग के लिए उचित कार्रवाई करने का आधार बन सकता है, जैसे कि लाइसेंस रद्द करना, जुर्माना लगाना, या अन्य कानूनी कार्रवाई करना।
कानूनी कार्रवाई:
संबंधित चिकित्सा परिषद (जैसे कि भारतीय चिकित्सा परिषद, आयुर्वेदिक बोर्ड, होम्योपैथी बोर्ड) उस डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। स्वास्थ्य विभाग भी संबंधित नियमों के आधार पर डॉक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है।



