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₹400000 एक जान की कीमत होती है तो पिता ने कहा मुझेसे डबल ले जाइए और लाकर दीजिए मेरा बेटा।

पीड़ित परिवारों के आह्वान पर मुख्य बाजार पूरी तरह रहा बंद, धरना स्थल पर हस्ताक्षरकर सामाजिक एकता का प्रतीक दिया

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर 

स्वतंत्र हरदा। पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट से लोग पीड़ित हुए। उनके परिवारों के प्रति व्यापारियों के द्वारा संवेदनाएं हैं। शहर बंद करने का आह्वान पर व्यापारियों का समर्थन जिला मुख्यालय का मुख्य बाजार घण्टाघर चौक, कपड़ा बाजार, सराफा बाजार, बड़ा मंदिर क्षेत्र, नारायण टॉकीज सहित अन्य इलाकों में सुबह से एक भी दुकान नहीं खुली है। वहीं, शहर के बाहरी क्षेत्रों में बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। यहां पर कुछ दुकानें बंद रही है जबकि सब्जी, दूध, मेडिकल स्टोर्स खुले रहे। दुखद घटना के पश्चात पीड़ित अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। मुख्य मांगों के लिए प्रशासन से मिलकर अपनी बात को रख सके ताकि पीड़ित परिवारों को बाजार मूल्य के हिसाब से मुआवजा मिले और मृतकों के परिवारों को सहारा पहुंचे।

एसडीएम बोले आरोपियों की संपत्ति कुर्क कर दी जाएगी सहायता

धरना स्तर पर बाजार बंद के दौरान एसडीएम केसी परते ने कहा कि शासन ने सभी पीड़ित परिवारों का सर्वे कराकर उन्हें राहत राशि प्रदान की जा चुकी है। एनजीटी के आदेश के परिपालन में आरोपियों की चल अचल संपत्ति की कुर्की को लेकर नीलम कर कोर्ट के आदेश से पीड़ित परिवारों को क्षतिपूर्ति की राशि प्रदान की जाएगी।

भूख हड़ताल और धरने पर बैठे पिता ने अपने मृतक पुत्र को न्याय दिलाने की मांग 

फटाका फैक्ट्री संचालक के ऊपर जो धाराएं लगी है, वह धाराएं जमानती धारा है, उनके ऊपर 302 धारा लगानी चाहिए। पूर्व में भी फटाका फैक्ट्री में आग लगने से कहीं जान गवाही है उसमें भी इनके ऊपर जमानती धारा लगी थी। इसके बाद वहां जमानत पर छूट का भर जाकर अपना कारोबार फिर से चलने लगे प्रशासन अगर पहले शक्ति दिखाता तो आज इतना बड़ा हादसा नहीं होता और आज मेरा पुत्र मुझसे दूर नहीं

जाता।

Swatantra Harda

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