हरदा में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा: मरीजों की जान पर बन आई
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- शाहरुख बाबा चीफ एडिटर
स्वतंत्र हरदा। एक तरफ जहां सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर हरदा के निवासियों को बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इतनी दयनीय है कि मरीजों की जान पर बन आई है। निम्नलिखित समस्याएं सबसे अधिक चिंताजनक हैं:
1. डॉक्टरों की उपलब्धता का अभाव
किसी को यह नहीं पता कि डॉक्टर कब और कितनी देर के लिए अस्पताल आएंगे। इस अनिश्चितता के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ जाती हैं।
2. आंखों के डॉक्टरों की घर पर सेवाएंआँ
ख के डॉक्टरों द्वारा घर पर ही मरीजों को देखा जा रहा है, जिससे अस्पताल में उनकी उपलब्धता कम हो जाती है। इससे आँखों की बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उचित समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
3. महिला डॉक्टरों की सीमित उपलब्धता:
महिला डॉक्टरों का भी घर पर ही मरीजों को देखना, अस्पताल में महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न करता है। महिला मरीजों को इस स्थिति का भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
4. डायलीसिस सेवाओं का अनिश्चित समय
डायलीसिस जैसी महत्वपूर्ण सेवा के लिए कोई स्थाई समय नहीं है। इससे गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए जीवन रक्षक सेवाओं का लाभ उठाना मुश्किल हो गया है।
5. मशीनों का सही उपयोग न होना
अस्पताल में आधुनिक मशीनें तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर नहीं हैं। इस कारण मशीनों का सही उपयोग नहीं हो पाता और मरीजों को आवश्यक सेवाएं नहीं मिल पातीं। हरदा के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इन समस्याओं का त्वरित समाधान निकाला जाए। डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, डायलीसिस जैसी सेवाओं के लिए स्थाई समय सारणी बनाई जाए, और मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटरों की नियुक्ति की जाए। सरकार और स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा की जाती है कि वे हरदा के निवासियों की इन गंभीर समस्याओं पर ध्यान दें और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएं।



