वेतन कटौती और पीएफ न मिलने से भड़के जिला अस्पताल के आउटसोर्स कर्मचारी, कलेक्टर कार्यालय में दिया धरना
दो घंटे तक धरने पर बैठे रहे कर्मचारी, बाद में सीएमएचओ के समझने के बाद 10 कर्मचारियों को कलेक्टर केबिन में बुलाया गया

हरदा। जिला चिकित्सालय में कार्यरत आउटसोर्स सफाईकर्मी एवं सुरक्षा गार्ड बुधवार को वेतन कटौती, पीएफ भुगतान न होने, ओवरटाइम का पारिश्रमिक नहीं मिलने और समय पर तनख्वाह न दिए जाने जैसी गंभीर समस्याओं को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। कर्मचारियों ने कलेक्टर से सीधे मुलाकात की मांग को लेकर करीब दो घंटे तक धरना दिया और प्रशासन के सामने अपनी मांगों पर अड़े रहे, लेकिन इस दौरान कलेक्टर बाहर नहीं आए।

कर्मचारियों का आरोप है कि वे कलेक्टर को बाहर बुलाने के लिए लगातार दो घंटे तक धरने पर बैठे रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस बीच सीएमएचओ एचपी सिंह के समझने के बाद प्रशासन की ओर से केवल 10 कर्मचारियों को कलेक्टर केबिन में बुलाकर बातचीत की गई। इसे लेकर कर्मचारियों में नाराजगी देखी गई, उनका कहना था कि जब सभी कर्मचारी अपनी समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे हैं तो चुनिंदा लोगों से ही चर्चा करना न्यायसंगत नहीं है।

कर्मचारियों ने बताया कि ठेकेदार ज्यूस इंटरप्राइज़ेस, भोपाल द्वारा हर माह वेतन में मनमानी कटौती की जा रही है। शासन के नियमानुसार 10 तारीख तक वेतन भुगतान का प्रावधान है, लेकिन उन्हें 15 से 20 तारीख के बीच वेतन दिया जाता है। ओवरटाइम करने के बावजूद उसका भुगतान नहीं होता और साप्ताहिक अवकाश का लाभ भी नहीं दिया जा रहा। सफाईकर्मियों का कहना है कि भोपाल चिकित्सा विभाग से 16 हजार रुपए वेतन स्वीकृत होकर आता है, लेकिन उन्हें मात्र 8 हजार से 8,200 रुपए ही मिलते हैं। सुरक्षा गार्डों की वास्तविक सैलरी 12 हजार रुपए बताई जा रही है, जबकि कटौती के बाद उन्हें केवल 8,200 रुपए दिए जाते हैं।
हर माह पीएफ के नाम पर लगभग 1,400 रुपए काटे जाते हैं, लेकिन पीएफ खाते में राशि जमा होने की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती। धरने की सूचना पर ADM पुरुषोत्तम कुमार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित कुमार मिश्रा मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। इस पूरे मामले पर कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। कर्मचारियों के खातों में आने वाली राशि, कटौती का विवरण और वास्तविक देय वेतन का डाटा एकत्र किया जाएगा। जांच के बाद जो राशि बनती है, उसकी भरपाई ठेकेदार से करवाई जाएगी।



