राजपूत समाज व सर्व समाज की मौन रैली में उमड़ा जनसैलाब, हरदा बंद पूरी तरह सफल, लाठीचार्ज के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, 10 हजार से अधिक लोगों ने दी एकजुटता की मिसाल

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर स्वतंत्र हरदा
हरदा। 13 जुलाई को राजपूत छात्रावास में हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में शनिवार को राजपूत समाज व सर्व समाज द्वारा हरदा बंद का आह्वान पूरी तरह सफल रहा। बंद के दौरान शहर की सभी दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, बस सेवाएं और सार्वजनिक गतिविधियां पूर्णतः ठप रहीं। इस दौरान दोपहर 1 बजे से एक अभूतपूर्व और अनुशासित मौन न्याय रैली निकाली गई, जिसमें करीब 10,000 से अधिक समाजजन शामिल हुए। रैली ने यह संदेश दिया कि अन्याय के विरुद्ध शांतिपूर्ण और संगठित विरोध भी उतना ही प्रभावशाली हो सकता है। रैली की शुरुआत राजपूत छात्रावास से हुई, जहां सभी ने काली पट्टियां बांधकर विरोध जताया। रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए घंटाघर पहुंची, जहां महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सत्य और अहिंसा की राह पर चलने का संकल्प लिया गया। इसके पश्चात रैली पुनः छात्रावास पहुंची, जहां प्रदर्शन का समापन हुआ।

उन्होंने मांग थी कि छात्रावास में घुसकर छात्रों और युवाओं पर बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। समाज का आरोप है कि यह कार्रवाई न केवल गैरकानूनी थी, बल्कि छात्रों की गरिमा और स्वाभिमान को भी ठेस पहुंचाने वाली रही। हरदा शहर ही नहीं, बल्कि हंडिया, रहटगांव, सिराली, खिरकिया, करताना सहित पूरे जिले में बंद का व्यापक असर देखा गया। शुक्रवार को ही राजपूत समाज के प्रतिनिधियों ने व्यापारियों से संपर्क कर सहयोग की अपील की थी, जिसे व्यापारियों और अन्य समाजों ने पूर्ण समर्थन दिया। नतीजतन, शनिवार सुबह से ही पूरा शहर शांतिपूर्वक बंद रहा।

पुलिस बोल रहा तैनात…!
रैली के दौरान पुलिस बल हर चौराहे और प्रमुख स्थानों पर तैनात रहा, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से रैली पूरी होने पर किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। रैली का अनुशासन और संयम प्रशासन के लिए भी एक सकारात्मक संकेत रहा। समाजजनों ने स्पष्ट किया कि यह रैली केवल विरोध नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि यदि पुलिस प्रशासन द्वारा दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तो आगे और बड़े आंदोलन की दिशा तय की जाएगी। रैली के शांतिपूर्ण स्वरूप ने यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो वह बिना हिंसा के भी अपनी बात पूरे बल से कह सकता है।




