हरदा में 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित, निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध
भू-जल स्तर 39.8 मीटर पर पहुँचा, गर्मी बढ़ने से और गिरावट की आशंका; पेयजल संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त आदेश

शाहरुख बाबा चीफ़ एडिटर स्वतंत्र हरदा
हरदा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट में यह सामने आया है कि जिले में इस वर्ष भू-जल स्तर 39.8 मीटर दर्ज किया गया है, जो विगत वर्षों की तुलना में चिंताजनक रूप से नीचे है। आगामी महीनों में तापमान में तेज़ वृद्धि और भीषण गर्मी के कारण भू-जल स्तर में और गिरावट की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार जिले में घरेलू उपयोग, व्यवसायिक गतिविधियों और अन्य प्रयोजनों के लिए निजी नलकूप खनन लगातार बढ़ रहा है, जिससे पेयजल स्रोत प्रभावित हो सकते हैं। स्थिति को नियंत्रित करने और आगामी गर्मी में जल संकट से बचने के लिए कड़े कदम आवश्यक माने गए हैं।
कलेक्टर का आदेश: पूरे जिले में जल अभावग्रस्त घोषित
भू-जल उपलब्धता को सुरक्षित रखने और जिले के नागरिकों को निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने म.प्र. पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 एवं संशोधित अधिनियम 2022 की धारा 3 के अंतर्गत हरदा जिले को 1 अप्रैल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक, अथवा पर्याप्त वर्षा होने तक, जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। कलेक्टर ने कहा कि पेयजल वितरण को सुचारु बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, इसलिए जिले में विशेष प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू किए जा रहे हैं। नए निजी नलकूप, हैंडपंप खनन पर पूर्ण प्रतिबंध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत जारी आदेशों में निम्न प्रतिबंध शामिल हैं पूरे हरदा जिले में नए निजी नलकूप और हैंडपंप का खनन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के कोई भी प्राइवेट ट्यूबवेल या हैंडपंप नहीं खोदा जा सकेगा। गर्मी के इस अवधि में किसी भी जल स्रोत से कृषि सिंचाई, औद्योगिक उपयोग या बड़े पैमाने पर जल दोहन बिना अनुमति के प्रतिबंधित रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्तियों पर वैधानिक कार्रवाई करते हुए दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाएंगे।

अनुमति जारी करने का अधिकार SDM को
नलकूप खनन अथवा सिंचाई की अनुमति जारी करने के लिए जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारियों (SDM) को उनके-अपने क्षेत्र के लिए अधिकृत किया गया है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि आपातकालीन परिस्थितियों या अत्यधिक आवश्यकता की स्थिति में नियंत्रित रूप से अनुमति प्रदान की जा सके। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि जल संकट की गंभीरता को देखते हुए पानी का दुरुपयोग न करें और अधिकाधिक जल संरक्षण उपाय अपनाएं, ताकि गर्मी के दौरान पेयजल संकट से बचा जा सके।


