हरदा में किसान दोहरी मार से परेशान, न खाद मिली न पानी.. मुआवजा लंबित, बिजली कटौती और खाद की कालाबाजारी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें

शाहरुख बाबा चीफ़ एडिटर स्वतंत्र हरदा
हरदा। जिले के किसान इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। खरीफ सीजन में अत्यधिक बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन किसानों को अब तक उसका उचित मुआवजा नहीं मिल पाया। इसी बीच रबी सीजन की बोनी के समय किसानों को न तो समय पर यूरिया और डीएपी खाद मिल रही है और न ही नहरों से टेल क्षेत्र तक पर्याप्त पानी पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि मजबूरी में उन्होंने साहूकारों से कर्ज लेकर रबी फसल की बोनी तो कर ली, लेकिन सिंचाई के लिए नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। विशेषकर टेल क्षेत्र के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां खेत सूखे पड़े हैं और फसलें खतरे में हैं। स्थिति को और गंभीर बनाते हुए जिले में खाद की कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि सरकारी समितियों में खाद उपलब्ध नहीं है, जबकि खुले बाजार में ऊंचे दामों पर खाद बेची जा रही है। इसके साथ ही बिजली विभाग द्वारा गांव-गांव जाकर किसानों के कनेक्शन काटे जा रहे हैं और बिजली आपूर्ति में भी भेदभाव किया जा रहा है, जिससे सिंचाई कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहन विश्नोई ने कहा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं और उनकी समस्याओं की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिला कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिनों के भीतर टेल क्षेत्र में नहरों का पानी नहीं छोड़ा गया और किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद उपलब्ध नहीं कराई गई, तो कांग्रेस किसानों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम करने को मजबूर होगी।



