कृषि

एमएसपी पर खरीदी जाने वाली सोयाबीन के दामों की समीक्षा पुनः की जाये: हेमंत टाले

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर 

स्वतंत्र हरदा। सोयाबीन खरीदी को लेकर केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के बयान से स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा की केन्द्र और प्रदेश सरकार किसानों के प्रति कितनी असंवेदनशील है। उक्त आरोप लगाते हुए राजीव गांधी पंचायती राज संगठन प्रदेश अध्यक्ष हेमंत टाले ने कहा है कि सोयाबीन खरीदी के संबंध में श्री चौहान ने कहा है कि देश के प्रधानमंत्री और सरकार किसान हितों के लिए प्रतिबद्ध है। जबकि विगत् 10 वर्षों में देश का किसान बेहद उपेक्षित रहा है। किसानों ने जब भी अपने हक की आवाज उठाई है, भाजपा सरकार ने हमेशा उसका दमन किया है। वर्तमान समय में भी सोयाबीन के दाम को लेकर जब म.प्र. के किसान आन्दोलनरत् है, तो श्री चौहान बयान दे रहे है कि हम प्रदेश सरकार के सम्पर्क में है, प्रदेश सरकार की जैसे ही मांग आयेगी, हम समर्थन मूल्य पर खरीदी की अनुमति दे देंगे। अपने बयान में उन्होंने स्वीकार किया है कि यह प्रक्रिया कर्नाटक, तेलंगाना एवं महाराष्ट्र में प्रारंभ हो चुकी है। इससे स्पष्ट होता है कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, उन राज्यों ने किसानों के हितों को देखते हुए समय रहते ही प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। वहीं एनडीए शासित महाराष्ट्र में भी यह प्रक्रिया आगामी माह में विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रारंभ कर दी है, अन्यथा वहाँ भी मध्यप्रदेश जैसे ही हाल होते। दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में अभी कोई चुनाव नहीं है, इसलिए भाजपा की केन्द्र और राज्य सरकार को यहाँ के किसानों की कोई चिन्ता नहीं है। अगर किसान आन्दोलन का रास्ता अपनाकर आगे नहीं आते, तो अभी तक केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकार इस संबंध में कोई चर्चा भी नहीं करती। श्री चौहान कह रहे है कि हम किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम देने के लिए प्रतिबद्ध है। जबकि वर्तमान में केन्द्र सरकार ने जो सोयाबीन का भाव एमएसपी पर घोषित किया है, उस दाम से तो किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल है। सोयाबीन के समर्थन मूल्य की दर सुनिश्चित करने के लिए इसकी पुनः समीक्षा करना अनिवार्य है। किसानों को उनकी सोयाबीन फसल का उचित दाम मिल सके, इसके लिए किसान संगठन एवं कांग्रेस पार्टी प्रदेश में लगातार आवाज उठा रही है। अगर समय रहते किसानों के साथ न्याय नहीं हुआ तो आने वाले समय में और उग्र आन्दोलन होंगे।

Swatantra Harda

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