अवैध क्लिनिक और फर्जी डॉक्टरों की विस्थापना: हरदा के स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी
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- शाहरुख बाबा चीफ एडिटर
स्वतंत्र हरदा। हरदा जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर अवैध क्लिनिक और फर्जी डॉक्टरों के मामले में सख्त एक्शन की कमी के बावजूद, लोगों को फिर भी संकोच बना रहता है। पिछले छह सालों में जिले में 2 या 3 गुना अवैध क्लिनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों के खुलने की रिपोर्टें आ रही हैं। इस पर, स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शिकायतों को ध्यान में लेने की बजाय बेचैन बैठे रहते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि फर्जी डॉक्टरों के इलाज से कई लोगों की जान भी चली गई है, लेकिन इसके बावजूद भी, अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। जिले में कई ऐसे क्लिनिक हैं, जहां पंजीकृत डॉक्टर के नाम पर फर्जी डॉक्टर अपनी दुकान चला रहे हैं। इन क्लिनिकों में छोटे बच्चों से लेकर माइनर ऑपरेशन तक हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टरों की सील होना और लेटर पेड का इस्तेमाल करना अनिवार्य होना चाहिए, लेकिन इन क्लिनिकों में यह प्राथमिकता नहीं है। इस चिंता की स्थिति में, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से लोगों की आशा है कि उन्हें जल्द से जल्द कठोर कार्रवाई करते हुए इस समस्या का समाधान किया जाए।
फर्जी डॉक्टरों द्वारा चलाए जा रहे क्लिनिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
जिले में फर्जी डॉक्टरों द्वारा चलाए जा रहे कई क्लिनिकों के मामले में बड़ी गंभीरता सामने आ रही है। इन क्लिनिकों में न केवल माइनर ऑपरेशन बल्कि छोटे बच्चों के इलाज भी किए जा रहे हैं। एक्सपोज के दौरान पाया गया कि कई क्लिनिकों पर डॉक्टर के नाम से चलाई जा रही हैं, जबकि वास्तव में वहां कोई पंजीकृत डॉक्टर मौजूद नहीं है। इसके अलावा कई फर्जी डॉक्टरों के सर्टिफिकेट टांगे जा चुके हैं। जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस मामले में कार्रवाई करने की बात कही है, लेकिन अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। जिले के विभागीय अधिकारियों को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है ताकि फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सके और जनता को सही चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।
डॉक्टरों को दवाओं की प्रायोगिकता के संदर्भ में कुछ नियम होते हैं।
1.लेटर पेड का उपयोग: डॉक्टर को दवा लिखते समय अपने लेटर पेड का उपयोग करना चाहिए। लेटर पेड पर डॉक्टर के नाम, पद, और पंजीकरण संख्या शामिल होते हैं। इससे मरीज की निश्चितता बढ़ती है कि वह वास्तव में एक पंजीकृत डॉक्टर से सलाह ले रहे हैं।
2. सील की आवश्यकता: यदि डॉक्टर के पास लेटर पेड नहीं है, तो उन्हें अपनी सील का उपयोग करना चाहिए। यह सील डॉक्टर की पहचान के रूप में कार्य करती है।
3.क्लीनिक परामर्श: किसी भी क्लिनिक में रजिस्टर्ड डॉक्टर के अलावा कोई भी परामर्श नहीं दे सकता। क्लीनिक जिस डॉक्टर के नाम पर रजिस्टर्ड है, वहां केवल वही डॉक्टर चिकित्सा परामर्श दे सकता है।
इन नियमों का पालन किया जाना चाहिए ताकि मरीजों को सही चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।



