शिकायत

टिमरनी विधायक अभिजीत शाह पर बढ़ा राजनीतिक संकट, आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने का मामला पहुँचा एआईसीसी, कांग्रेस आलाकमान ने तलब किया जवाब

शाहरुख बाबा चीफ़ एडिटर स्वतंत्र हरदा 

टिमरनी। मध्य प्रदेश कांग्रेस के टिमरनी विधायक अभिजीत शाह इन दिनों पार्टी के भीतर बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। वजह—हरदा जिले के रहटगांव में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के हिंदू सम्मेलन में उनकी मंच उपस्थिति। यह मामला अब जिला और प्रदेश की सीमाओं को पार कर सीधे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँच गया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान ने इस प्रकरण को अत्यधिक गंभीर मानते हुए विधायक अभिजीत शाह से औपचारिक स्पष्टीकरण माँगा है। वहीं प्रदेश कांग्रेस ने भी घटना से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को सौंप दी है। कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में हलचल तब शुरू हुई, जब कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। स्थानीय जिला कांग्रेस नेताओं ने इसे पार्टी लाइन के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। विरोध के बाद मुद्दा प्रदेश स्तर तक पहुँचा और फिर अब मामले ने राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप ले लिया है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के घोषित सिद्धांतों से इतर RSS कार्यक्रम में मंच साझा करना पार्टी की वैचारिक लाइन से विचलन माना जा रहा है, जिस पर विधायक की स्पष्ट प्रतिक्रिया अनिवार्य है। अब पार्टी की निगाहें अभिजीत शाह के आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं, जिसके बाद संगठन आगे की रणनीति तय करेगा।

कांग्रेस जिला प्रवक्ता आदित्य गार्गव ने उठाई आपत्ति, 20 जनवरी को की थी शिकायत

जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आदित्य गार्गव इस पूरे विवाद को जन्म देने वाले पहले नेता रहे। उन्होंने 20 जनवरी को आधिकारिक रूप से शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि RSS के हिंदू सम्मेलन में विधायक का शामिल होना कांग्रेस की घोषित वैचारिक नीति के खिलाफ है और इससे उनकी कांग्रेस विचारधारा के प्रति निष्ठा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगता है।।प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अभिजीत शाह ने न केवल आयोजन में मंच साझा किया बल्कि अपने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्यक्रम की जानकारी भी प्रसारित की, जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर होता है, जो RSS की विचारधारा का प्रतिरोध करते हुए संघर्ष कर रहे हैं। आदित्य गार्गव ने राहुल गांधी के सांप्रदायिक सद्भाव और संविधान बचाओ आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि जहाँ एक ओर राहुल गांधी RSS की विचारधारा का खुलकर विरोध कर रहे हैं, वहीं हमारे कुछ विधायक ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होकर इस लड़ाई को कमजोर कर रहे हैं। इन नेताओं को स्पष्ट करना चाहिए कि वे गांधी-नेहरू-पटेल-बोस की विचारधारा के साथ हैं या गोडसे और RSS की विभाजनकारी विचारधारा के साथ?

Swatantra Harda

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