कांग्रेस नेता केदार सिरोही ने पुलिस महानिदेशक को लिखा पत्र, भाजपा दबाव में कार्रवाई का आरोप, पूछा पुलिस व्यवस्था संविधान से चलेगी या राजनीतिक नाराजगी से?

शाहरुख बाबा चीफ एडिटर स्वतंत्र हरदा
हरदा। टिमरनी थाना प्रभारी (टीआई) सुभाष और प्रधान सिपाही (हेडकांस्टेबल) जगदीश पांडव के स्थानांतरण/लाइन अटैचमेंट को लेकर अब राजनीति गरमा गई है। इस मामले में कांग्रेस नेता केदार सिरोही ने पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल को पत्र लिखकर सवाल उठाए हैं। दोनों अधिकारी अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से आते हैं। हेडकांस्टेबल जगदीश पांडव ने टिमरनी व्हाट्सऐप ग्रुप पर लव जिहाद पोस्ट पर सिर्फ इतना लिखा था कि “अपना सीखा खोटा तो दूसरों पर ब्लेम करने का क्या फायदा, अगर किसी को बुरा लगे तो माफी चाहता हूं”। इस टिप्पणी के बाद उन्होंने तत्काल माफी भी मांग ली थी। बावजूद इसके भाजपा नेताओं ने धार्मिक रंग देकर धरना-प्रदर्शन किया और ढाई घंटे के भीतर थाना प्रभारी और प्रधान सिपाही पर कार्रवाई करा दी। पत्र में सिरोही ने यह भी उल्लेख किया कि वार्ड की नाली में गंदगी, सफाई की समस्या और मोटरसाइकिल टक्कर प्रकरण में वाहन न छोड़ने जैसी बातों पर भी भाजपा नेता नाराज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पुलिस अधिकारियों की नौकरी भाजपा नेताओं की नाराजगी और प्रशंसा पर तय की जा रही है।
सिरोही ने पत्र में पांच प्रमुख सवाल उठाए –
1. संबंधित टीआई और प्रधान सिपाही को किस प्रशासनिक/कानूनी आधार पर तत्काल प्रभाव से हटाया गया?
2. पुलिस बल में स्थानांतरण, लाइन अटैचमेंट अथवा निलंबन की क्या निर्धारित प्रक्रिया है?
3. क्या केवल स्थानीय प्रदर्शन या जनदबाव पर कार्रवाई करना सही है, या विभागीय जांच आवश्यक है?
4. क्या अन्य मामलों में भी इतनी ही तीव्रता से कार्रवाई की जाती है?
5. क्या जिले की कानून व्यवस्था अब भाजपा नेताओं की रीति-नीति से चलेगी या पुलिस मैनुअल और संविधान के अनुसार सिरोही ने पुलिस महानिदेशक से मांग की है कि इस मामले में पारदर्शिता के साथ स्पष्टीकरण दिया जाए और उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए। उन्होंने कहा कि इससे आमजन में पुलिस व्यवस्था पर विश्वास कायम रहेगा और अधिकारियों के मनोबल पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। टिमरनी के थाना प्रभारी, सुभाष दरश्यंकर बखूबी अपना कर्तव्य निभा रहे थे वह किसी राजनीतिक दल की नहीं सुनते थे, अपना काम से मतलब रखते थे, यही बात टिमरनी के नेताओं को अच्छी नहीं लगी और मौके की तलाश में थे, यह सही मौका मिला और नेताओं ने थाने का घिराव कर प्रभारी को हटवाया और कांस्टेबल को लाइन अटैच करवा दिया।



